गिनीज विश्व रिकॉर्ड वह रिकॉर्ड है, जिसके अंतर्गत पृथ्वी के किसी भी कोने का व्यक्ति, यदि प्रतिभावान हो तो अपना नाम दर्ज करा कर विश्व स्तर पर अपना नाम रौशन कर सकता है. हालाँकि इसके अंतर्गत अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन देने की आवश्यकता होती है. इस विश्व रिकॉर्ड के अंतर्गत नाम दर्ज़ा कराने का सपना कई लोगों का होता है, किन्तु इसके अंतर्गत केवल वही लोग अपना नाम दर्ज करा पाते हैं, जिनके अन्दर विश्व स्तर की प्रतिभा हो और उस प्रतिभा में व्यक्ति को कोई दूसरा हरा न सके. यहाँ पर इससे सम्बंधित विशेष बातों का वर्णन किया जा रहा है.
गिनीज विश्व रिकॉर्ड क्या है (What is Guinness World Record)
गिनीज विश्व रिकॉर्ड का आरम्भ वर्ष 1958 में हुआ था. यह विश्व रिकॉर्ड वर्ष 1998 तक ‘द गिनीज बुक ऑफ़ रिकॉर्ड’ के नाम से चला और इसके बाद इसका नाम ‘द गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ हो गया. यह एक तरह का रिकॉर्ड बुक है, जिसे प्रतिवर्ष पुनः संपादित किया जाता है और नए नए विश्व रिकॉर्ड इसमें शामिल किये जाते हैं. इसके अंतर्गत मनुष्य द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड और विभिन्न प्राकृतिक रिकॉर्ड को शामिल किया जाता है. यह किताब ख़ुद भी एक विश्व रिकॉर्ड बना चुकी है, इस किताब ने ‘बेस्ट सेल्लिंग कॉपीराइटेड बुक ऑफ़ आल टाइम’ का ख़िताब हासिल किया है. यह किताब विश्व भर के 100 देशों में 23 विभिन्न भाषाओँ में पिछले 63 वर्षो से प्रकाशित होती रही है. इसके अंतर्राष्ट्रीय फ्रैंचाइज़ी ने अब इसके नाम से म्यूजियम और टीवी चैनल शुरू करने की भी योजना बनायी है. इसमें आये रिकार्ड्स में विश्व के विभिन्न स्थानों के लोगों द्वारा बनाए गये विश्व रिकार्ड्स शामिल हैं.
गिनीज विश्व रिकॉर्ड का इतिहास (Guinness World Record History)
गिनीज विश्व रिकॉर्ड का एक बहुत लंबा इतिहास रहा है. 10 नवम्बर 1951 में सर Hugh Beaver, जो कि उस समय Guinness Breweries कंपनी के निर्देशक थे, उनके दिमाग़ में यह बात आई कि विश्व में अबतक कोई ऐसी पुस्तक नहीं आई है, जिसमें विश्व रिकॉर्ड सम्बंधित बातें शामिल हों. इस किताब को पढ़ने से कई सारे प्रश्नों का उत्तर एक क्षण में मिल सकता है जैसे यूरोप का सबसे तेज़ ‘गेम बर्ड’ कौन सा है आदि.
इसी समय गिनीज विश्व रिकॉर्ड किताब के लिए सर Hugh का आईडिया तब अधिक प्रभाव में आया, जब गिनीज के एक कर्मचारी Christopher Chataway ने अपने यूनिवर्सिटी के दो दोस्तों को इस काम के लिए चुना. इनके ये दोनों दोस्त इस समय लन्दन में ‘फैक्ट फाइंडिंग’ एजेंसी चला रहे थे. इनके दोनों दोस्तों का नाम Norris और Ross McWhirter था. इन दो भाइयों के देख रेख में कई रिकार्ड्स इकट्ठे किये गये और उन्हें किताब की शक्ल देकर हज़ारों प्रतियां प्रकाशित कर लोगों के बीच बांटी गयीं.
इसके उपरान्त 107, फ्लीट स्ट्रीट में गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड की स्थापना की गयी. 27 अगस्त 1955 को पहली बार इस स्थान से 198 पन्नों की गिनीज विश्व रिकॉर्ड की किताब का प्रकाशन हुआ और इस वर्ष के क्रिसमस के दौरान ब्रिटिश बेस्टसेलर साबित हुआ. इसके अगले ही वर्ष यह किताब अमेरिका में भी प्रकाशित की गयी और वहाँ पर इसकी 70,000 प्रतियाँ बिकीं. इस समय तक ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ शब्द आम लोगों की ज़ुबान पर चढ़ चूका था. इस किताब ने किताबो की बिक्री के अंतर्गत अपने रिकॉर्ड बनाए. इस रिकॉर्ड के अंतर्गत 100 विभिन्न देशों में 100 मिलियन प्रतियाँ 37 भाषाओँ में बिकी थी.
अचानक हिट होने की वजह से यह किताब कई अन्य प्रकाशों की नज़र में भी आई और उन्होंने भी इसका प्रकाशन करना चाहा. इस किताब की सफलता के बाद मैकवीटर ने प्रतिवर्ष इसका सम्पादन शुरू किया और प्रतिवर्ष इसके कई नए एडिशन आते रहे. इसके उपरान्त इस किताब पर आधारित एक ब्रिटिश टीवी शो भी रिलीज़ किया गया, जिसका नाम था रिकॉर्ड ब्रेकर. यह टीवी शो वर्ष 1998 से 2000 तक चला और बच्चों के बीच काफ़ी प्रसिद्द हुआ.
गिनीज विश्व रिकॉर्ड का महत्व (Guinness World Records Important)
एक विश्व स्तरीय संस्था होने की वजह से यह अंतर्राष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण है. इसके अंतर्गत कई ऐसे लोगों के नाम शामिल होते हैं, जोकि अपने अन्दर विश्व स्तर पर पसंद आने वाली प्रतिभा रखते हैं. इसके अंतर्गत अपनी प्रतिभा के ज़रिये अपना नाम शामिल करा लेने पर व्यक्ति विश्व भर में ख्याति प्राप्त करता है, जिससे उसे एक अलग पहचान प्राप्त होती है. जब कोई व्यक्ति गिनीज विश्व रिकॉर्ड के अंतर्गत अपना नाम किसी प्रतिभा द्वारा दर्ज कराता है तो उसे इस संस्था द्वारा एक सर्टिफिकेट प्राप्त होता है, जिसमें व्यक्ति द्वारा प्राप्त विश्व रिकॉर्ड के ख़िताब का वर्णन होता है.
भारत ने विश्व स्तर पर हमेशा से अपना नाम बनाया है. इस विश्व रिकॉर्ड में भी भारत के कई लोगों का नाम शामिल है. यहाँ पर गिनीज विश्व रिकॉर्ड के अंतर्गत भारत का वर्णन किया जा रहा है.
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